मनुष्य अपना विनाश कैसे करता है?

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63) क्रोध से मनुष्य की बुद्धि का नाश हो जाता है यानी मनुष्य के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। जब सोचने समझने की शक्ति नही बचती तो मनुष्य सही गलत का निर्णय नही कर पाता और इस अवस्था मे वो अपना ही Read more…