दान देने से क्या फर्क पड़ता है?

एक महिला पर्यटक अकेली एक जंगल मे घूम रही थी अचानक उसको एक महंगा पत्थर मिला।

अगले दिन उसी जंगल मे उसे दूसरा पर्यटक मिला जो बहुत भूखा था। जब महिला पर्यटक ने कुछ खाना निकालने के लिए अपना बैग खोला तो दूसरे पर्यटक ने वो चमकता पत्थर देख लिया।

उसने महिला पर्यटक से वो पत्थर मांग लिया, और महिला पर्यटक ने उससे बिना कुछ पूछे वो पत्थर उसे दे दिया।

अब दूसरा पर्यटक खुशी खुशी वहाँ से चला गया। वो मन ही मन सोच रहा था कि ये पत्थर इतना कीमती है जिससे वो अपनी सारी जिंदगी आराम से गुजार सकता है।

लेकिन, कुछ दिनों बाद वही पर्यटक वापिस आके उस कीमती पत्थर को उसी महिला को वापिस कर दिया।

उसने महिला से कहा, “मुझे पता है यह पत्थर बहुत बहुमूल्य है लेकिन मैं इस आशा से ये पत्थर आपको लौटाने आया हूं कि आप इससे ज्यादा बहुमूल्य की चीज़ मुझे दे सको।” आप मुझे वो बहुमूल्य चीज़ दे दो जिसने आपको ये पत्थर मुझे देने के लिए प्रेरित किया।

इस बात पे वो महिला 😊 मुस्कराने लगी और बोली यही तो “देने का आनंद है”।

इस छोटी सी कहानी के जरिये बस मै ये बताना चाहता हूं जो ज्यादातर लोग नही जानते कि देने का आनंद बहुत बड़ा होता है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा आप देना सीखें।


Chandra Prakash Shukla

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