safalata kya hai

सफलता के लिए क्या जरुरी है ?

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्। तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥ (द्वितीय अध्याय, श्लोक 37) अर्थ : हे अर्जुन तुम अपना कर्म ( युद्ध) करो और अपना पूरा प्रयास करो यदि सफल नहीं हुए ( वीरगति को प्राप्त हुए) तो तुम्हे अवश्य ही यश की प्राप्ति होगी (स्वर्ग Read more…

मनुष्य अपना विनाश कैसे करता है?

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63) क्रोध से मनुष्य की बुद्धि का नाश हो जाता है यानी मनुष्य के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। जब सोचने समझने की शक्ति नही बचती तो मनुष्य सही गलत का निर्णय नही कर पाता और इस अवस्था मे वो अपना ही Read more…

anger

क्रोध क्यों आता है?

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ (द्वितीय अध्याय, श्लोक 62) अर्थ: विषय यानि वस्तुओं, या काम के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उससे Attachment हो जाता है। इससे उसमे कामना या इच्छा पैदा हो जाती है और फिर अगर उसमे कोई रूकावट आती है तो क्रोध की उत्पत्ति Read more…

दान देने से क्या फर्क पड़ता है?

दान देने से क्या फर्क पड़ता है? एक महिला पर्यटक अकेली एक जंगल मे घूम रही थी अचानक उसको एक महंगा पत्थर मिला। अगले दिन उसी जंगल मे उसे दूसरा पर्यटक मिला जो बहुत भूखा था। जब महिला पर्यटक ने कुछ खाना निकालने के लिए अपना बैग खोला तो दूसरे Read more…